सुनसान सड़क
कुछ सालों पह्ले कि बात है। जयपुर के पास एक गाँव था उस गाँव में जाने और आने का एक ही
रास्ता था जो सिर्फ और सिर्फ सुनसान रास्ते के नाम से जाना जाता था। गाँव के लोग कहते थे शाम 6 बजे के बाद कोई भी उस रस्ते से आता जाता नहीं था और जो भी 6 बजे के बाद गलती से भी उस रास्ते मे चला गया वो कभी वापस नहीं लौटा। सभी गाँव के लोगो में डर था। यहां तक गाँव के लोग शाम होते ही 7 बजे तक सो जाते थें। गाँव के लोगो का कहना था की रात को तरह तरह कि आवाजें आती थी जैसे किसी के
रोने की, किसी के चिल्लाने की, गाँव के लोग बहुत डरे हुए थे आखिर ये क्या हो रहा था। इस रास्ते ने गाँव के लोगों का सूख चेन सब छीन लिया था। जब गाँव के लोग अपने काम पर उस रास्ते से जाते और आते थे तो
उनके परिवार को बस एक ही चिंता रहती थीं की उनके पति हो या बच्चे बस गाँव में सही
सलामत आ जाएँ। आखिर उस रास्ते में ऐसा क्या था की गाँव के लोग इतने डरे हुए थे। चलिये जानते है।
आखिर कैसे पड़ा इसका नाम सुनसान रास्ता

इसी गाँव में एक परिवार रहता था इस परिवार मे 6 जने थे । उनमें एक लडकी जिसका नाम पुष्पा था वह अपने ही गाँव के लड़के जिसका नाम वीरेन्द्र था उससे प्यार करती थीं वह दोनो एक दूसरे से प्यार करते थे जब ये बात पुष्पा के परिवार को पता चली तो पुष्पा के माता पिता ने उसको बहुत समझाया की ये शादी नहीं हो सकती ये हमारे गाँव और बिरादरी के खिलाफ है । लेकिन पुष्पा अपनी जिद पर अड़ी रही और आखिर में माता पिता इस शादी के लिये मान गये। जब ये बात गाँव के लोगो को पता चली तो उन्होनें इस शादी का और पुष्पा के परिवार का कड़क विरोध करना शुरु किया लेकिन पुष्पा और उसके माता पिता ने गाँव के लोगो की बात मानने से इनकार किया । जब वीरेन्द्र अपने माता और पिता के साथ पुष्पा के घर सगाई करने आया तब गाँव के लोगो ने एक सड़यंत्र रचा और सगाई की रात को पुष्पा के घर मे आग लगा दी । पुष्पा और वीरेन्द्र के परिवारो को ज़िंदा जला दिया और सभी की जली हुई लाशो को गाँव के बाहर एक रास्ते मे दफन कर दिया। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था पुष्पा और वीरेन्द्र के परिवार को मुक्ति तो मिल गई लेकिन पुष्पा को नहीं मिलीं क्यूँकि पुष्पा ने मरते हुए इस गाँव को श्राप दिया था कि इस गाँव के लोगों का जीना बेहाल कर दूंगी इनका सूख चेन सब छीन लूँगी। जैसा कि पुष्पा ने कहा था वैसा ही किया । आज भी लोगो का मानना है की पुष्पा कि आत्मा आज भी उसी रास्ते में भटकती है। इसीलिए इस रास्ते का नाम सुनसान रास्ता पड़ा।
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